http://ASTRODEEPALI.COM
DEEPALIASTROCARSNOIDA 5a71e453d7ba54050c4e2954 False 142 6
OK
background image not found
Updates
update image not found
Best Astrologer in Delhi NCR मोहिनी एकादशी 2018 : एकादशी पूजा विधी और व्रत कथा मोहिनी एकादशी व्रत मोह-माया के बंधनों से मुक्त करता है। मोहिनी एकादशी व्रत प्रत्येक वर्ष वैशाख शुक्ल की एकादशी तिथी को मनाया जाता है। इस साल मोहिनी एकादशी व्रत 26 अप्रैल 2018 गुरुवार के दिन है। यह व्रत करने से पाप से मुक्ति दिलाता है जो व्यक्ति इस व्रत को करता है वह सारे मोह-माया से मुक्त हो जाता है, तथा वह मोक्ष को प्राप्त करता है। मोहिनी एकादशी का महत्व स्कंद पुराण के अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ था तब अमृत कलश पाने के लिए दानवों और देवताओं के मध्य जब विवाद हो गया तब दानवों को मोहित करने के लिए भगवान विष्णु ने सुंदर स्त्री का रुप धारण किया और दानवों को मोहित कर श्री विष्णु ने अमृत कलश लेकर देवताओं को सारा अमृत पीला दिया था और सभी देवता अमृत पीकर अमर हो गये। और कहा जाता है कि जिस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था उस दिन वैशाख शुक्ल एकादशी तिथि थी इसी कारण भगवान विष्णु के इसी मोहिनी रूप की पूजा मोहिनी एकादशी के रूप में की जाती है। यही जो भक्त यह व्रत करता है वह अपनी सभी परेशानियों को मोहिनी रूप धारण कर समाधान करने का सामर्थ्य रखेगा। जानें एकादशी व्रत व पूजन विधि व्रत के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठें नित्य कर्म कर शुद्ध जल से स्नान करें। कुश और तिल के लेप का प्रयोग कर स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें और देवों का पूजन करने के लिए कलश की स्थापना कर लें, कलश के ऊपर लाल रंग का वस्त्र बांध कर पहले कलश का पूजन करें। कलश का पूजन करने के पश्चात उसके उपर भगवान की तस्वीर या प्रतिमा रखें, इसके बाद भगवान की प्रतिमा को स्नानादि से शुद्ध कर उत्तम वस्त्र पहनाना चाहिए। धूप, दीप से आरती उतारने के बाद फल, मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद प्रसाद वितरित कर ब्राह्मणों को भोजन तथा दान-दक्षिणा दें। रात्रि में भगवान का कीर्तन करते हुए मूर्ति के पास ही सोना चाहिए। एकादशी व्रत कथा सरस्वती नदी के किनारे भद्रावती नाम का एक नगर था। जहां पर एक धनपाल नाम का वैश्य रहता था, जो धन-धान्य से परिपूर्ण था। वह सदा पुण्य कर्म में ही लगा रहता था। उसके पांच पुत्र थे। इनमें सबसे छोटा धृष्टबुद्धि था। वह पाप कर्मों में अपने पिता का धन लुटाता रहता था। एक दिन वह नगर वधू के गले में बांह डाले चौराहे पर घूमता देखा गया। इससे नाराज होकर पिता ने उसे घर से निकाल दिया तथा बंधु-बांधवों ने भी उसका साथ छोड़ दिया। वह दिन-रात दुख और शोक में डूब कर इधर-उधर भटकने लगा। एक दिन वह किसी पुण्य के प्रभाव से महर्षि कौण्डिल्य के आश्रम पर जा पहुंचा। वैशाख का महीना था। कौण्डिल्य गंगा में स्नान करके आए थे। धृष्टबुद्धि शोक के भार से पीड़ित हो मुनिवर कौण्डिल्य के पास गया और हाथ जोड़कर बोला, ब्राह्मण ! द्विजश्रेष्ठ ! मुझ पर दया कीजिए और कोई ऐसा व्रत बताइए जिसके पुण्य के प्रभाव से मेरी मुक्ति हो जाए।तब ऋषि कौण्डिल्य ने बताया कि वैशाख मास के शुक्लपक्ष में मोहिनी नाम से प्रसिद्ध एकादशी का व्रत करो। इस व्रत के पुण्य से कई जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं। धृष्टबुद्धि ने ऋषि की बताई विधि के अनुसार व्रत किया। जिससे वह निष्पाप हो गया और दिव्य देह धारण कर श्री विष्णुधाम को चला गया।
Tags:
http://ASTRODEEPALI.COM/best-astrologer-in-delhi-ncr-/b25
2 3
false