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Famous Astrologer in Delhi अष्टम दुर्गा - माँ महागौरी मां दुर्गा का आठवां स्वरूप महागौरी है. अपने इस रूप में मां आठ वर्ष की हैं. इसलिए नवरात्रि की अष्टमी को कन्या पूजन की परंपरा है. धर्मिक मान्यताओं के अनुसार महागौरी की उपासना से इंसान को हर पाप से मुक्ति मिल जाती है. - नवदुर्गा का आठवां स्वरूप हैं महागौरी. - भगवान शिव की प्राप्ति के लिए इन्होंने कठोर पूजा की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ गया था. - इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने इनको दर्शन देकर से मां का शरीर कांतिमय कर दिया तब से इनका नाम महागौरी पड़ा. - माना जाता है कि माता सीता ने श्री राम की प्राप्ति के लिए महागौरी की पूजा की थी. - महागौरी श्वेत वर्ण की हैं और सफेद रंग मैं इनका ध्यान करना बहुत लाभकारी होता है. - विवाह संबंधी तमाम बाधाओं के निवारण में इनकी पूजा अचूक होती है. - ज्योतिष में इनका संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है. कैसे करें महागौरी की पूजा : - महागौरी की पूजा पीले कपड़े पहनकर करें. - मां के सामने दीपक जलाएं और उनका ध्यान करें. - फिर मां को सफेद या पीले फूल चढ़ाएं और उनके मंत्रों का जाप करें. - मध्य रात्रि में इनकी पूजा की जाए तो परिणाम ज्यादा शुभ होंगे. देवी को प्रसाद में क्या अर्पित करें : - अष्टमी के दिन मां को नारियल का भोग लगाएं. - नारियल को सिर से घुमाकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें. - मान्यता है कि ऐसा करने से आपकी मनोकामना पूर्ण होगी. महागौरी की कृपा से बीमारियां दूर होती हैं : - देवी के इस स्वरूप की आराधना से मधुमेह और हारमोंस की समस्या दूर होती है. - आंखों की हर समस्या से छुटकारा मिलता है. - हर तरह के सुख की प्राप्ति में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं. महागौरी की पूजा से मजबूत करें कुंडली का शुक्र : - मां की उपासना सफेद कपड़े पहनकर करें. - मां को सफेद फूल और सफेद मिठाई चढ़ाएं और उन्हें इत्र भी अर्पित करें. - पहले देवी महागौरी के मंत्र का जाप करें. - फिर शुक्र के मूल मंत्र 'ॐ शुं शुक्राय नमः' का जाप करें. - मां को अर्पित किया हुआ इत्र अपने पास रख लें और इसका इस्तेमाल करते रहें. अष्टमी पर कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा का महत्व और नियम : - नवरात्रि नारी शक्ति के और कन्याओं के सम्मान का भी पर्व है. - इसलिए नवरात्रि में कुंवारी कन्याओं को पूजने और भोजन कराने की परंपरा भी है. - हालांकि नवरात्रि में हर दिन कन्याओं के पूजा की परंपरा है, लेकिन अष्टमी और नवमी को कन्याओं की पूजा जरूर की जाती है. - 2 वर्ष से लेकर 11 वर्ष तक की कन्या की पूजा का विधान बताया है. - अलग-अलग उम्र की कन्या देवी के अलग अलग रूप को दर्शाती है. जरूरत के समय धन नहीं रहता तो करें ये उपाय : - महागौरी को दूध से भरी कटोरी में रखकर चांदी का सिक्का अर्पित करें. - इसके बाद मां से धन के बने रहने की प्रार्थना करें. - सिक्के को धोकर हमेशा के लिए अपने पास रख लें.
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